सीटी स्कैन क्या है कैसे होता है, फायदे और नुकसान | CT Scan Kya Hai
आज के समय में हम लोग अनेक बीमारियों से घिरे हुए है. और इन बीमारियों के लिए डॉक्टर अनेक तरह के टेस्ट या फिर स्कैन करवाते है, और उनमें से एक है सीटी स्कैन. अगर आपको भी सीटी स्कैन के बारे में जानकारी नहीं है तो यह पोस्ट आपके लिए ही है.

सीटी स्कैन क्या है
सीटी स्कैन का पूरा नाम कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन (Computerized Tomography Scan) है. इसमें कंप्यूटर तथा घूमती हुई एक्स-रे (X-ray) मशीन की मदद से बॉडी के विभिन्न भागों का टुकड़ों में चित्र लिया जाता है. नार्मल एक्स-रे इमेज की तुलना में सीटी स्कैन में ज्यादा डिटेल में जानकारी प्राप्त होती है. इसमें बॉडी के रक्त वाहिकाओं, मुलायम कोशिकाओ तथा हड्डियों के संबंधित विचारों के चित्र साफ दिखाई देते है. सीटी स्कैन का इस्तेमाल कंधे, सर, रीढ़ की हड्डी, पेट, दिल, छाती तथा घुटने से जुडी समस्याओं के लिए किया जाता है.
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सीटी स्कैन कैसे होता है
सीटी स्कैन कराने वाले व्यक्ति को सीटी स्कैन करवाने से कुछ घंटे पहले कुछ भी खाने या पीने से मना करा जाता है. साथ ही सीटी स्कैन से पहले अगर कोई भी धातु या गहने आदि पहने है तो उन्हें उतारने के लिए कहा जाता है. उसके बाद व्यक्ति को सीटी स्कैन की मशीन के अन्दर टेबल पर लेटा दिया जाता है. सीटी स्कैन होते समय व्यक्ति को हिलने-डुलने से मना किया जाता है. क्युकी हिलने-डुलने से चित्र धुंधले हो सकता है. इसीलिए मरीज को सीधे तथा एक ही अवस्था में लेटने के लिए बोला जाता है.
सीटी स्कैन के जरिये एक संकीर्ण एक्स-रे बीम का इस्तेमाल किया जाता है तथा वह मरीज की बॉडी के आस-पास घूमता है तथा बॉडी के अलग-अलग भागों से छवियों की एक श्रृंखला तैयार करता है. बॉडी के सारे हिस्सों का क्रॉस सेक्शनल चित्र बनाने के लिए इसमें कंप्यूटर के द्वारा इस जानकारी को उपयोग किया है.
अनेक टुकड़ों में चित्र बनाने के पश्चात कंप्यूटर के जरिये इस तरकीब का इस्तेमाल किया जाता है. फिर कंप्यूटर इन चित्रों को स्कैन करके 3डी इमेज में बदल देता है और इसे चिकित्सक आसानी से देख लेते है तथा इसमें बॉडी के सभी हिस्सों का चित्र साफ़ दिखाई देता है.
सीटी स्कैन क्यों किया जाता है
सीटी स्कैन का इस्तेमाल शरीर में चोट और शरीर में होने वाली बीमारियों का उपचार करने के लिए किया जाता है. सीटी स्कैन की रिपोर्ट में यह पता चल जाता है कि मरीज को कौन सी बीमारी है. तथा बॉडी का कौन सा हिस्सा किस वजह से प्रभावित है. सीटी स्कैन में मिनटों से लेकर आधे घंटे तक का वक्त भी लग सकता है. इसमें लगने वाला समय इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज की बॉडी के किस हिस्से का सीटी स्कैन हो रहा है.
शरीर के किन हिस्सों का सीटी स्कैन किया जाता है
दिमाग में चोट, खोपड़ी फ्रैक्चर होने तथा ब्लीडिंग से निदान के लिए सीटी स्कैन का इस्तेमाल होता है.
सीटी स्कैन का इस्तेमाल बॉडी में अनेक रोगों के निदान तथा इंजरी का पता लगाने हेतु किया जाता है.
मस्तिष्क ट्यूमर और मस्तिष्क में रक्त के थक्के के निदान के लिए सीटी स्कैन करते है.
इन्फेक्शन, जोड़ो में समस्या और हड्डियों में फ्रैक्चर आदि के निदान के लिए सीटी स्कैन करते है.
अंदरूनी ब्लीडिंग के निदान के लिए सीटी स्कैन किया जाता है साथ ही एक्सीडेंट के बाद होने वाले आंतरिक रक्स्राव के निदान के लिए भी सीटी स्कैन करते है.
हृदय रोग तथा कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के प्रभावशीलता का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन करते है. इन सबके अलावा भी बहुत सी चीज़ों के लिए सीटी स्कैन किया जाता है.
सीटी स्कैन के फायदे
इमरजेंसी में सीटी स्कैन के द्वारा अंदरूनी चोट तथा ब्लीडिंग का पता लगने से मरीज को अनावश्यक सर्जरी से बचाया जाता है.
सीटी स्कैन के बाद व्यक्ति के बॉडी में रेडिएशन का कोई प्रभाव नही रहता है.
सीटी स्कैन में दर्द नहीं होता और यह सुरक्षित भी है. इसके अलावा सीटी स्कैन से सही जानकारी मिलती है, जिससे चिकित्सक को बीमारी के उपचार में मदद मिलती है.
सीटी स्कैन के नुकसान
सीटी स्कैन कराते समय मशीन से रेडिएशन निकलते है, कभी-कभी इनकी वजह से स्किन में एलर्जी हो सकती है.
अगर आप डायबिटीज के पेशेंट है तथा मेटफॉर्मिन जैसी मेडिसिन का इस्तेमाल कर रहे है तो सीटी स्कैन से पहले डॉक्टर को बताएं. इसके अलावा यदि आपको किडनी से जुड़ी कोई समस्या है तो डॉक्टर को जरूर बताएं.
सीटी स्कैन के समय उल्टी तथा जी मचलने की समस्या हो सकती है. इसी वजह से सिटी स्कैन कराने से पहले कुछ भी खाने-पीने को मना किया जाता है.

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